Tuesday, 18 October 2011

ek umeed...

जब रात अँधेरी  छाए और चाँद डूब जाए 
जब सूरज की एक किरण ना आये
तब रौशनी बन कर तुम आना
हाथ बढ़ाना और कहीं दूर ले जाना
वहाँ ले जाना जहां ना कोई हमें ढूंढ पाए
ना पहचान पाए

जब हिम्मत टूट जाए और हम समझ ना पाए
किस ओर से हम आयें और किस ओर को हम जाएं
तब मेरा सहारा बन जाना
जब मुसीबतें ख़त्म ना हो पायें
तब तुम उम्मीद की किरण ले कर आना
और सारे अँधेरे दूर ले जाना

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